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रोक के बावजूद देवघर के डढ़वा नदी पुल के पास से धड़ल्ले से बालू का उठाव हो रहा है.
शहर के बीचो-बिच नियमो की धज्जियाँ उड़ रही है और प्रशासन चुप है.
मामला बेहद दिलचस्प है, झारखंड में देवघर के डढ़वा नदी पुल से बालू उठाव की वजह से देवघर का जसीडिह का लाइफ लाइन पुल दो साल पहले भर-भरा कर गिर गया था.
उस स्थान के इर्द-गिर्द से बालू का धड़ल्ले से उठाव हो रहा है, जबकि अब नया पुल बन रहा है, बगल में रेलवे पुल भी है.
रोक के बावजूद, अवैध रूप से बालू के उठाव से जहाँ राजस्व की हानि हो रही है. वही, इसका असर पेय जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है.
जब मामले का खुलासा हुआ और अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी गई तो कार्रवाई की बात की जा रही है. दो साल पुरानी डढ़वा नदी पर बना पुल भर-भरा कर गिर गया.
मामले की जब जांच हुई तो बात सामने आई की इस पुल के इर्द-गिर्द बालू का उठाव हो रहा था. इसके बाद प्रशासन ने बालू उठाव पर रोक लगा दी, लेकिन नदी पर उसी जगह एक नया पुल बन रहा है.
लेकिन मनमानी देखिये, ये इस नदी से बालू ही नहीं निकाल रहे है बल्कि इसके खनन के लिए बाकायदा जेपीसी का भी इस्तेमाल कर रहे है और सिर्फ देढ्वा नदी पर बनाने वाला पुल से ही नहीं कई और भी सरकारी कामों में यहाँ से दर्जनों ट्रैक्टर बालू का उठाव हो रहा है.
बालू उठाव 100 मीटर के दूरी पर हो रहा है और अब डढ़वा नदी तालाब का रूप ले चुका है.
दूसरी सबसे अहम् बात यह है कि इस नदी से देवघर शहर को पानी का सप्लाई होता है. लिहाज पूर्व डीसी ने उन सभी जगहों से बालू उठाव पर रोक लगा रखी है.जहाँ से भी पानी का सप्लाई होती है वहां से बालू उठाव पर रोक रहेगी.
लगातार बालू चोरी के बाद जब इस मामले की तफ्तीश की गई और बाद में आला अधिकारियों तक बात पहुंचाई गई तो डीडीसी ने देवघर के सीओ को इसकी रोकथाम के आदेश दिये.
साथ ही कहा कि ये गलत है और इससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान है और काम भी नियम के विरुद्ध है.
डीडीसी के आदेश के बाद सीओ ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकार किया और तुरंत बालू उठाव पर रोक लगा दी थी.
देवघर की जनता भी मानती है कि एक बार ये पुल सिर्फ बालू उठाव के कारण ही गिरा है. वही कार्य फिर से हो रहा है. ऐसे में दोषियों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए. वहीं राज्यपाल से भी इस मामले की जांच करने की मांग की है.
शहर के बीचो-बिच नियमो की धज्जियाँ उड़ रही है और प्रशासन चुप है.
मामला बेहद दिलचस्प है, झारखंड में देवघर के डढ़वा नदी पुल से बालू उठाव की वजह से देवघर का जसीडिह का लाइफ लाइन पुल दो साल पहले भर-भरा कर गिर गया था.
उस स्थान के इर्द-गिर्द से बालू का धड़ल्ले से उठाव हो रहा है, जबकि अब नया पुल बन रहा है, बगल में रेलवे पुल भी है.
रोक के बावजूद, अवैध रूप से बालू के उठाव से जहाँ राजस्व की हानि हो रही है. वही, इसका असर पेय जलापूर्ति पर भी पड़ रहा है.
जब मामले का खुलासा हुआ और अधिकारियों को इस बात की जानकारी दी गई तो कार्रवाई की बात की जा रही है. दो साल पुरानी डढ़वा नदी पर बना पुल भर-भरा कर गिर गया.
मामले की जब जांच हुई तो बात सामने आई की इस पुल के इर्द-गिर्द बालू का उठाव हो रहा था. इसके बाद प्रशासन ने बालू उठाव पर रोक लगा दी, लेकिन नदी पर उसी जगह एक नया पुल बन रहा है.
लेकिन मनमानी देखिये, ये इस नदी से बालू ही नहीं निकाल रहे है बल्कि इसके खनन के लिए बाकायदा जेपीसी का भी इस्तेमाल कर रहे है और सिर्फ देढ्वा नदी पर बनाने वाला पुल से ही नहीं कई और भी सरकारी कामों में यहाँ से दर्जनों ट्रैक्टर बालू का उठाव हो रहा है.
बालू उठाव 100 मीटर के दूरी पर हो रहा है और अब डढ़वा नदी तालाब का रूप ले चुका है.
दूसरी सबसे अहम् बात यह है कि इस नदी से देवघर शहर को पानी का सप्लाई होता है. लिहाज पूर्व डीसी ने उन सभी जगहों से बालू उठाव पर रोक लगा रखी है.जहाँ से भी पानी का सप्लाई होती है वहां से बालू उठाव पर रोक रहेगी.
लगातार बालू चोरी के बाद जब इस मामले की तफ्तीश की गई और बाद में आला अधिकारियों तक बात पहुंचाई गई तो डीडीसी ने देवघर के सीओ को इसकी रोकथाम के आदेश दिये.
साथ ही कहा कि ये गलत है और इससे सरकारी राजस्व का भी नुकसान है और काम भी नियम के विरुद्ध है.
डीडीसी के आदेश के बाद सीओ ने भी मामले की गंभीरता को स्वीकार किया और तुरंत बालू उठाव पर रोक लगा दी थी.
देवघर की जनता भी मानती है कि एक बार ये पुल सिर्फ बालू उठाव के कारण ही गिरा है. वही कार्य फिर से हो रहा है. ऐसे में दोषियों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए. वहीं राज्यपाल से भी इस मामले की जांच करने की मांग की है.
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