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Sunday, 26 May 2013

खूनी बन गई है कोडरमा जिले की सड़कें

कोडरमा, जिले की अधिकतर सड़कें खूनी बन गई है। जिले में औसतन प्रत्येक दिन दो दुर्घटनायें हो रही हैं और एक की मौत हो रही है। सबसे अधिक दुर्घटनाएं जिले के एकमात्र राष्ट्रीय राजमार्ग -31 में हो रही है। सड़क पर सुरक्षा नियमों पर किसी का भी ध्यान नहीं है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर मुख्य चौराहों में कहीं भी जेबरा क्रॉसिंग नहीं है। राजमार्ग से एक-दो फीट फासले से सटे विद्युत के खंभे खतरे को सबसे ज्यादा आमंत्रित कर रहे हैं। वहीं कई जगहों पर पक्की सड़क के फ्लैंक को भरने पर ध्यान नहीं दिया गया है। सड़क के किनारे एक-एक फीट तक गढ्डे बन गए हैं। ऐसे में यदि किसी वाहन का चक्का सड़क से नीचे उतरता है तो बड़ी दुर्घटना तय है। एनएच-31 पर कोडरमा का बजरंगबली चौक, कोडरमा घाटी में नौवांमाइल, जमशोती नाला, झुमरीतिलैया में सतपुलिया, माइकानेट, गुमो महतो आहर, झुमरीतिलैया बाइपास स्थित इंदरवा चौक, तिलैया बस्ती चौक, सहित कई ऐसे जगह हैं, जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। सतपुलिया और महतो आहर के समीप तो सड़क को खूनी सड़क के रूप में जाना जाता है। यहां पिछले दस वर्षो में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। राष्ट्रीय उच्चपथ प्रमंडल इन स्थलों पर सुरक्षा के मानकों पर ध्यान देने का काम कभी नहीं करता है। पिछले एक महीने के अंदर जिले में विभिन्न सड़क दुर्घटनाओं में अबतक करीब तीस से ज्यादा लोगों को मौत हो चुकी है। एनएच के अलावा कोडरमा-गिरिडीह रोड, कोडरमा कोवार पथ सहित अन्य पथों में आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं।
चालकों की लापरवाही भी है दुर्घटनाओं का कारण : हाल के दिनों में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं के पीछे मुख्य कारण चालकों की लापरवाही भी है। लगन के समय में वाहनों चालकों की अत्यधिक व्यस्तता, नींद पूरी नहीं होना, शराब के नशे में वाहन चलाना इसका प्रमुख कारण है। दिन-रात वाहन चलाने और नींद पूरी नहीं होने के कारण पलक झपकते ही बड़ी दुर्घटना हो जाती है। इसके अलावा स्टोन चिप्स लदे ट्रकों को नौसिखवे ड्राइवर या वाहन के खलासी चलाते हैं जिसपर कोई धर पकड़ नहीं होती। ऐसे ट्रकों को किशोरवय के ड्राइवर डोमचांच से कोडरमा के बीच हांकते कभी भी देखे जा सकते हैं। वहीं शहर में सड़कों पर चलनेवाले बाइकर्स भी काफी तेज रफ्तार से कलाबाजी करते हुए वाइक चलाते हैं और मौत को आमंत्रित करते हैं। बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं का यह भी एक प्रमुख कारण है। पिछले दो माह में मोटरसाइकिल दुर्घटनाओं में भी दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। वाहनों की संख्या में दिन-दोगुना वृध्दि हो रही है, जबकि सड़कों की चौड़ाई सीमित है। एनएच को फोरलेन करने का प्रस्ताव है, लेकिन इस दिशा में काम काफी धीमी गति से चल रहा है।

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