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Friday, 24 May 2013

छोटे कर्मचारी की बलि ले रहा प्रबंधन

छोटे कर्मचारी की बलि ले रहा प्रबंधन
चिरकुंडा/निरसा : एमपीएल में कोयले हेराफेरी के मामले में विस्थापित युवक लक्ष्मण मोदी को जेल भेजे जाने के मामले में एमपीएल विस्थापित व स्थानीय समिति ने शुक्रवार को एचआर हेड के साथ बैठक कर नाराजगी जताई। समिति का कहना है कि हेराफेरी के मामले में बड़े अधिकारी के बजाय छोटे-छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।
समिति ने एचआर हेड एसएस चौधरी से कहा कि एमपीएल विस्थापितों को ट्रेनिंग के हिसाब से काम देने की बजाए दूसरे कार्य में लगाकर उसे जेल भिजवाने का काम कर रही है। लक्ष्मण मोदी ने वेल्डर की ट्रेनिंग ली है। जबकि प्रबंधन उससे कोल यार्ड में डाटा इंट्री का काम ले रहा है।
समिति ने कहा कि हेराफेरी का मामला पहली बार नहीं हुआ है बल्कि इसके पूर्व भी इस प्रकार की घटना हो चुकी है। एमपीएल में कोयले की देखरेख करने वाले विभाग के बड़े अधिकारी भी इसके लिए दोषी हैं। उन्होंने कहा कि एमपीएल ने इस मामले में पहले क्यों नहीं शिकायत दर्ज कराई।
एचआर हेड एसएस चौधरी ने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं एमपीएल भी मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी आतंरिक जांच करा रही है। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक किसी को दोषी करार देना उचित नहीं है। चौधरी ने कहा कि अगर लक्ष्मण मोदी दोषी नहीं होगा तो उसे छुड़ाने के लिए एमपीएल उसकी पूरी मदद करेगा। वहीं चौधरी ने कहा कि कोयले के मामले में जहां जहां गड़बड़ी है उसे दूर करने का प्रयास जारी है।
बैठक में समिति के अध्यक्ष अशोक मंडल, महासचिव राम रंजन मिश्रा, कामाख्या चौधरी, सपन तिवारी, सुबल तिवारी, सपन लोहार, पीसी माजी, समर लोहार, मनोहर मंडल सहित अन्य उपस्थित थे।

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